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devrajbhai gadhvi lakhiaai na aangne navchandi yagn prasange yojayel day...

Devrajbhai Gadhavi                                  દેવરાજ ભાઈ ગઢવી લોકસાહિત્યકાર

Charan

ચારણ જાતી આશિષ ઉચારો અન્નપુર્ણા શ્રી ચરન મેં લીન હો મન ! અમ ર્હદય સિચો માં અમૃત સોનલ પ્રેમમયી લાગે લગન ! ચારણ જાતી                  ચારણ જાતિ એ ભારત વર્ષની એક વિશિષ્ટ જાતિ છે. ...

चारण महात्मा ईसरदासजी विरचित सिद्ध ग्रंथ देवयाण

जय माताजी દેવીયાણ - ભક્ત કવિ ઇસરદાસજી . . .  देवियांण – भक्त कवि ईसरदासजी छन्द- अडल करता हरता श्रीं ह्नोंकारी काली कालरयण कौमारी ससिसेखरा सिथेसर नारी जग नीमवण जयो जडधारी।1। धवा धवळगर धव धू धवळा क्रसना कुबजा कचत्री कमळा चलाचला चामुंडा चपला विकटाविकट भू बाला विमला ।2। 90 सुभगा सिवा जया श्री अंबा परिया परंमार पालंबा पिसाचणि साकणि प्रतिबंबा अथ आराधिजे अवलंबा।3। सं कालिका सारदा समया त्रिपुरा तारणि तारा त्रनया ओहं सोहं अखया अभया आई अजया विजया उमया ।4। छंद भुजंगी देवी उम्मया खम्मया ईसनारी देवी धारणी मुंड त्रिभुवन्नधारी देवी सब्बदां रूप ओम रूप सीमा देवी वेद पारक्ख धरणी ब्रहम्मा । 1। देवी कालिका मां नमो भद्रकाली देवी दूरगा लाघवं चारिताली देवी दानवा काल सुरपाल देवी देवी साधकं चारणं सिद्ध सेवी ।2। देवी जख्खणी भख्खणी देव जोगी देवी निर्मला भोज भोगी निरोगी देवी मात जानेसुरी व्रन्न मेहा देवी देव चामुंड संख्याति देहा ।3। देवी भंजणी दैत सेना समेता देवी नेतना तप्पना जय नेता देवी कालिका कूबजा कामकामा देवी रेणुका सम्मला रामरामा ।4। देव मालळी जोगणी मत्त मेघा द...

तनोटराय माता आवड़

: श्री आवड़ माता(तनोट माता) के आशीर्वाद से भारतीय सेना की तनोट के युद्ध में चमत्कारी विजय- (पोस्ट पढ़ने के बाद शेयर जरूर करे) डॉ नरेन्द्र सिंह आढा झांकर  इतिहास व्याख्याता राउमावि घरट सिरोही  भगवती श्री आवड़ माता ने वि• स• 808 चैत्र सुदी नवमी मंगलवार के दिन चारण मामड़जी के घर अवतार लेकर अपने जीवनकाल में कई चमत्कार कर दिखाये थे जिसकी एक विस्तृत श्रृंखला हैं। श्री आवड़ माता के चमत्कारों के कारण कवियों ने अपनी साहित्यिक रचनाओं में श्री आवड़ माता को 52 नामों से सम्बोधित किया जिसके कारण से भगवती श्री आवड़ माता 52 नामों से  विश्वप्रसिद्ध हुए ।  श्री आवड़ माता के वर्तमान परिपेक्ष्य में चमत्कारों का वर्णन करें तो हमें 20 वीं सदी के सम्पूर्ण विश्व की सर्वाधिक चमत्कारी घटना का स्मरण आ जाता है। ये घटना भारत पाकिस्तान के मध्य लड़े गये तनोट युद्ध (1965 ई) की हैं । भारत पाकिस्तान के बीच 1947 ई के विभाजन के समय से ही सम्बन्ध तनावपूर्ण रहें हैं । इसका मुख्य कारण भारत द्वारा कश्मीर रियासत का भारत संघ में विलय करना था। पाकिस्तान कश्मीर घाटी पर अधिकार करना चाहता था । इसी कार...

જુંગીવારા વિર વછરાજ સોલંકીનો ઇતિહાસ

જુંગીવારા વાછરા રાણા,ગાઉં તારા હેતથી ગાણા              દૂહો:- બેહ ગામે બેસણાં ધન્ય જુંગીવારા ધામ                   હૈયાની પુરે હામ વિશ્વાસુની વાછરો દેવભૂમિ દ્વારકા જિલ્લાના જામ ખં...

राज राजेस्वरी माँ राजल

 श्री राजल माता -चराडवा (गुजरात) राजल माता द्वारा अकबर से नवरोजा छुडवाना बीकानेर की संस्थापिका देवी करणीजी वि स १५९५ चैत सुदी नवमी को ज्योतिर्लीन हो गये। इनके ज्योतिर्लीन के ठीक दस मास पश्चात् यानि वि स १५९५ को माघ मास के शुक्ल पक्ष में सौराष्ट्र प्रान्त के ध्रांगध्रा तालुका के चराडवा गांव में वाचा शाखा के चारण उदयराज के घर राजबाई माता का जन्म हुआ। ये राजबाई राजल माता के नाम से करणी जी के पूर्णांवतार के रूप में जानी जाती है । १९३८ ईस्वी सन् को प्रख्यात इतिहासकार किशोरसिहजी बाहर्स्पत्य ने श्री करणीचरित्र ग्रंथ लिखकर बीकानेर महाराजा गंगासिह को समर्पित किया। लेखक के उक्त ग्रंथ को लिखने का एक मात्र कारण यह रहा था जो आजकल हमें व्हाटसप पर किरणदेवी नामक कल्पित पात्र द्वारा अकबर से नवरोज छुडवाने का प्रचार प्रसार करके अपने गौरव में श्री वृद्धि करके देवी राजल माता के ऐतिहासिक चरित को कमत्तर करने का प्रयास कर रहे है। नवरोजा प्रथा एक ऐसा राजपूताने का दाग था जिसे आई  श्री करणी माता के पूर्णांवतार राजल माता ने अपने दैविक शक्ति द्वारा समाप्त किया था और अकबर के इस लम्पट आचारण से राजपू...