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ब्रह्मानंद लादुदान, रंगदास, ब्रह्मानंद उपनाम जन्म 1772 अवसान  1832 परिवार की मां - लालुबा; पिता - शंभुदान गढ़वी पिंगल और रैतिक का अध्ययन करें स्वामीनारायण संप्रदाय का साधु क्षेत्र जीवन टपकता है राजस्थान के शिरोही राज्य में चरण परिवार में लादुदानजी के रूप में जन्मे शिरोही के राजकुमार ने उन्हें कविता पढ़ने के लिए भुज भेज दिया अध्ययन 1804 - स्वामी सहजानंदजी के साथ पुनर्मिलन। स्वामी सहजानंद से प्रेरित लादूदानजी सेवानिवृत्त हो गए। स्वामी ब्रह्मानंद हो गए। वड़ताल का विश्व प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर स्वामी ब्रह्मानंद की देखरेख में बनाया गया था। जूनागढ़ और मूल के स्वामीनारायण मंदिर भी उनके प्रवास के दौरान बनाए गए थे। गुजराती भाषा में लगभग 8000 छंदों की रचना और हिंदी में लंबी कविताएँ ब्रह्मानंद ने पहले शिव भजन के बाद गणेश वंदन की भजनों की रचना की। फिर रामवानी ने कुशना भजन दुर्गावनी की रचना की। गणेश भजन: जय गणेश ज्ञाननाथ दया निधि शिव भजन; सदाशिव सर्ववर दाता दिगंबर होतो आइसा हो राम भजन: रामनाम सुमरले का निधन कुषाण भजन: श्री कुष्णा कहे सूर्य अर्जन बेट हमरी तुमको समाजु ब्रह्मज्ञान निधान दुर्गा...
 #हिंदुओं #जानो #अपने #धर्म और #संस्कृति के #बारे #मे पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं - 1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन 4. नकुल।      5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी । वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं - 1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह 4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम 7. सह            8. विंद         9. अनुविंद 10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण 13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण 16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान 19. सुलोचन   20. चित्र...

ચારણ મહાત્મા સંતશ્રી નાગજણ ભગત રાજજૈયા

🌼नागाजण भगत राजैया 🌼        गाम. कालीकराय  तालुको पेटलावद जीलो.जाबुआ मा परजीया चारण ना नरा वंश नी पेटा साखा राजैया मां नागाजण भगत थाईग्या।      नागाजणभा नानपण थी  साधु  संतो ने जमाडता एने पोताना घरमा थी जे पैसा होय ते नो सामान लई आवी ने  दान करी नाखता आथी तेमना माता ने हंमेशा तेमनी चीता थती हती।           आथी तेमनी माता ऐ ऐक दीवस तेमणे पोताना सगा वहाला नी पासे चीन्ता व्यकत करता जणाव्यू के तमे बळद ना वेपारे जाव सो तो नागाजण ने भेगो लेता जाव।                  आथी ऐकदीवस नागाजणभा ना सगावहाला चारणो जे बळद ना वेपारे जता ता तो नागाजणभा ने पण साथे लीधा। बळद नो वेपार करवा जता  हता त्यारे तेमने रस्ता मां केटलाक साधु संतो मळ्या। तो नागाजणभा ये तेमने पुछ्यु के तमे बधा क्या जाव छो। तो साधु ऐ जवाब आप्यो के अमे उजैन कुंभ नो मेळो भराणो छे त्या जाई छी।  आ साभळी ने नागाजणभा तो साधु संतो ने मानवा वाळा अटले तेम ने पण त्या जवा नु मन थ्यु।        ...