🌼नागाजण भगत राजैया 🌼
गाम. कालीकराय तालुको पेटलावद जीलो.जाबुआ मा परजीया चारण ना नरा वंश नी पेटा साखा राजैया मां नागाजण भगत थाईग्या।
नागाजणभा नानपण थी साधु संतो ने जमाडता एने पोताना घरमा थी जे पैसा होय ते नो सामान लई आवी ने दान करी नाखता आथी तेमना माता ने हंमेशा तेमनी चीता थती हती।
आथी तेमनी माता ऐ ऐक दीवस तेमणे पोताना सगा वहाला नी पासे चीन्ता व्यकत करता जणाव्यू के तमे बळद ना वेपारे जाव सो तो नागाजण ने भेगो लेता जाव।
आथी ऐकदीवस नागाजणभा ना सगावहाला चारणो जे बळद ना वेपारे जता ता तो नागाजणभा ने पण साथे लीधा। बळद नो वेपार करवा जता हता त्यारे तेमने रस्ता मां केटलाक साधु संतो मळ्या। तो नागाजणभा ये तेमने पुछ्यु के तमे बधा क्या जाव छो। तो साधु ऐ जवाब आप्यो के अमे उजैन कुंभ नो मेळो भराणो छे त्या जाई छी। आ साभळी ने नागाजणभा तो साधु संतो ने मानवा वाळा अटले तेम ने पण त्या जवा नु मन थ्यु।
ऐटले नागाजणभा मोको मळता त्या छुपाई ग्या। तेमना सगावहाला चारणो जे साथे हता तेमणे तेमने घणा गोत्या पण नागाजणभा मळ्या नही। आथी ते बधा कंटाळी ने आगळ बळद ना वेपार माटे नीकळी ग्या।
नागाजणभा दोडता दोडता उजैन कुंभ मेळा मां हाफता अने थाकेली अवस्था मां पहोच्या।
त्या जयने तेमणे ऐक साधु ना अखाडा मां जई ने कीधु के मारे तमने बधाने जमाडवा छे। तो त्या बेठेला एक साधु ऐ तेमना कपाळ सामु जोयु तो तेमने लाग्यु के आ व्यक्ति कोई उचा कुळ नो छे। साधु ऐ परीचई पुछ्यो। ऐटले नागाजणभा ये परीचय आपता कह्यु के बापु हु चारण छु। एने मारी पासे बळद नो वेपार करी ने जे पैसा आव्या छे ते खोटा बीजे वपराय तेना करता मारे साधु ने जमाडवा छे।पछी अखाडा ना महंत ते हा पाडी ऐटले नागाजणभा ऐ बधा साधु ने जमाड्या। पछी अखाडा ना महंत साधु ऐ तेमने कीधु के तमे सवासो नवी लंगोट मंगावो। एटले नागाजणभा ये सवासो लंगोट मंगावी। पछी साधु ऐ नागाजणभा ने कीधु के तमे आ लंगोट बधा साधु ने ऐक-ऐक आपी दयो। अने तेमणे बीजा साधु ओ ने कीधु के तमारी जुनी लंगोट उतारी ने नागाजणभा ने आपी दीयो। अटले केटला क साधु ऐ ना पाडी पछी जे अखाडा ना महंत हता तेमळे कीधु के आ कोई सामान्य चारण नथी आ कोई सीधपुरुष छे। आ वात तेमनी मान्य राखी ने बधा साधु ऐ तेमनी लंगोट उतारी ने आपी दीधी। पछी अखाडा ना महंत ते नागाजणभा ने कीधु के आ बधी लंगोट तमे ऐक भडको करी ने सळगावी नाखो। आ थी नागाजणभा ये बधी लंगोट भडका मां नाखी दीधी। बधी लंगोट सळगी गय पण ऐक लंगोट जेमनी तेम रही।
आथी ते अखाडा नां महंते नागाजणभा ने कह्यु के तमे आ लंगोट नी वासळी बनावी नाखो ( वासळी ऐटले जुना समय मां लोको जे कपडा पहेर ता तेमा खीचा नोता आथी कपडा नु ऐक भुगळु बनावी तेने ऐकबाजु सीवी नाखता अने ऐक बाजु खुलू राखता अने तेमा पैसा भरी ने ते केडे बधी देता।) महंतना केवा थी तेमणे वासळी बनावरावी। पछी महंते कीधु के तमारी पासे जेटला पैसा होई ते आ वासळी मां भरी दीयो। अने वासळी मांथी एेक-ऐक दोकडो काढता रेजो। कोई दीवस वासळी ने उन्धी करता नई। आज पछी तमारे कोई दीवस पैसा खुटसे नई। आ बधु कहेनार महंत ने ज नागाजणभा ये तेमने गुरु बनाव्या हता।
आ आशिवॉद लई ने नागाजणभा पाछा घरे आवता रीया। त्यार पछी तेमणे वीचार आव्यो के मारे हजी साधु संतो ने जमाडवा छे एने दान पुन करवु छे।
ऐटले तेमणे गाम कालीकराय मां सवंत 1853 मां नागाजणबापु ये यग्न कर्यो। एने तुलसी वीवाह कर्या। आ तुलसी वीवाह नो यग्न तेमणे डोढ वषँ सुधी चालु राख्यो तो। तेमा सालीग्राम भगवान ना गणपती नी स्थापना करी हती। सालीग्राम ना लग्न कालीकराई आई माता तुलसी ना वीवाह मां पूरा भारत ना चारणो ने बोलाव्या। पुरा भारत ना राजा महाराजा ने पण बोलाव्या हता। लग्न मां खावा -पीवा नो खचँ नागाजणबापु चारणे उठाव्यो हतो। गवालीयर सरकार (राजा) जीवराजी राव सिंधीया पण आव्या हता। पवार गोत्र ना दरबार पण तुलसी वीवाह मां आव्या हता।डोढ वषँ चालेला आ तुलसी वीवाह मां भारत आखाना साधु ने पण बोलाव्याता। हादाराव अने पीता भीकाजी ने ऐक-ऐक हाथी पण दान मां आप्यो हतो। आ यग्न दरमीयान 1800 मण गांजो वपरायो हतो जे नागाजणबापु पेला 205 वषँ पेला राजा महाराजा ओ ऐ वापर्यो हतो।
कालीकरा मां महीं नदी ना काठे नागाजणबापु राजैया ये चार नाना-नाना मंदीर बनाव्या हता। तेमा पाच मुतिँ मुकवा मां आवी हती (1) शंकरभगवान नी (2) गणपती भगवान नी (3) महीं नदी मां नी (4)हनुमानजी (5)नागाजणबापु नी आ मुतिँ अने मंदीर आजे पण मोजुद छे।
गंगा नदी ना सोरम धाट ऊपर नागाजणबापु राजैया नु मंदीर आवेलु छे। त्या नागाजणबापु ऐ ब्राहमणो ने गायु नु दान कर्यु तु।
आ तुलसी वीवाह दरमीयान ऐक समय ऐवो आवेयो के यग्न समये धी खुट्यु ऐटले नागाजणबापु ऐ कीधु के पासे जे महीं नदी छे तेने प्राथना करी ने केजो के घी उछी नु आपे अने जेटला डबा तमे भरो ऐटला याद राखजो। एटले लोको महीं नदी मां थी जेटला डबा पाणी लई आव्या ता ऐटला डबा ज्या यग्न मां होमे त्या घी थई जातु पछी ज्यारे यग्न पुरो थ्यो ऐटले नागाजणबापु ऐ धी मंगावी ते महीं नदी मां ठलव्यु आजे पळ ते जग्यानु पाणी हाथ मां लई ऐटले पाणी अने घी भेगु थाई ने जे चीकास वळे ते आजे पण अनुभवाई छे।
नागाजणबापु नो 227 वषँ पेला लखायेलो ऐक दुहो पण छे जे नागाजणबापु ये करेल महा यग्न (तुलसी वीवाह)नी साक्षी पुरे छे।
।।ते महीं काठें माड्यों, राईजंग राजैया
ऐनी धुवारे झंकारना, नर केताक नागाजण।।
आवो मोटो यग्न पहेला कोई। चारणो ए करेल नथी। के जेमां आखा भारत ना चारणो, आखा भारत ना साधुऐ, अने आखा भारत ना राजा महाराजा ओ ने नोतरवा मां आव्या होय।
आवु मोटु काम करवा छता नागाजणबापु नो ईतीहास कोई पुस्तकों मां लखेल नथी।
आ ईतीहास मात्र बारोट ना चोपडा मां ज छे।
नागाजणबापु राजैया ना ईतीहास नी माहीती आपनार व्यक्ति ना नाम 🙏🏻
1) भरतदेव बारोट (रावलीयावदर)
2)वालाभा भासळीया ( नीमाड)
3)देवरामभाई दासाभाई बारोट गाम जाजोर (मध्य प्रदेश )
4)राजाभा सामळाभा राजैया (छतरडी)
5)नारेणभा राजैया (गाम: कालीकराय मध्य प्रदेश)
टाईपींग : भावेश राजैया (छतरडी)✍🏻
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