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જય શ્રી સ્વામીનારાયણ

ગોપાળાનંદ સ્વામી ના વચને જે બોરડી ના કાંટા ખરી ગયાં હતાં, એ પ્રસાદીની કાંટા વીનાની બોરડી......... આ બોરડી 188 વર્ષ જૂની છે. આ બોરડી વૃક્ષ રાજકોટ સ્વામિનારાયણ મંદિર માં છે. સર જહોન માલ...

જય શ્રી સ્વામીનારાયણ

ગોપાળાનંદ સ્વામી ના વચને જે બોરડી ના કાંટા ખરી ગયાં હતાં, એ પ્રસાદીની કાંટા વીનાની બોરડી......... આ બોરડી 188 વર્ષ જૂની છે. આ બોરડી વૃક્ષ રાજકોટ સ્વામિનારાયણ મંદિર માં છે. સર જહોન માલ...

જય માતાજી

जय रूपल जगदम्ब https://www.youtube.com/channel/UCNvgM5kfNhe29tEiCUA2kRQ *🔱જય માતાજી🔱* *👨‍👩‍👧‍👦જો તમે મારુ* *📡ચેનલ સબ્સસ્ક્રાઇબ ના કર્યું હોય* *🙏🏻 તો પ્લીઝ* *👆🏻સબ્સ્ક્રાઇબ કરી* *🔔નોટિફિકેશન બેલ દબાવીને* *📲આ લિંક તમારા બ...

नागणेच्यां माता का इतिहास

              जय श्री नागणेची माताजी नमः राठौड़ राजवंश और बारहठ - रोहडीया चारण कि कुलदेवी नागणेची माता का इतिहास ✍लिखने वाला जोगाराम डांगी किलवा साँचौर जालोर  राजस्थान के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी चक्रेश्वरी राठेश्वरी नागणेची या नागणेचिया के नाम से प्रसिद्ध है नागणेचिया माता का मंदिर राजस्थान में जोधपुर जिले के नागाणा गांव में स्थित है यह मन्दिर जोधपुर से 96 किमी.की दूरी पर है प्राचीन ख्यातों और इतिहास ग्रंथों के अनुसार मारवाड़ के राठौड़ राज्य के संस्थापक राव सिन्हा के पौत्र राव धूहड़ (विक्रम संवत 1349-1366) ने सर्वप्रथम इस देवी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाया। कर्नाटक से लाई गई थी नागणेची माता की प्रतिमा राजा राव धूहड़ दक्षिण के कोंकण (कर्नाटक) में जाकर अपनी कुलदेवी चक्रेश्वरी की मूर्ति लाये और उसे पचपदरा से करीब 7 मील पर नागाणा गाँव में स्थापित की जिससे वह देवी नागणेची नाम से प्रसिद्ध हुई नमक के लिए विख्यात पचपदरा बाड़मेर जोधपुर सड़क का मध्यवर्ती स्थान है जिसके पास (7 कि.मी.) नागाणा में देवी मंदिर स्थित है। जोधपुर में न...

devrajbhai gadhvi lakhiaai na aangne navchandi yagn prasange yojayel day...

Devrajbhai Gadhavi                                  દેવરાજ ભાઈ ગઢવી લોકસાહિત્યકાર

Charan

ચારણ જાતી આશિષ ઉચારો અન્નપુર્ણા શ્રી ચરન મેં લીન હો મન ! અમ ર્હદય સિચો માં અમૃત સોનલ પ્રેમમયી લાગે લગન ! ચારણ જાતી                  ચારણ જાતિ એ ભારત વર્ષની એક વિશિષ્ટ જાતિ છે. ...

चारण महात्मा ईसरदासजी विरचित सिद्ध ग्रंथ देवयाण

जय माताजी દેવીયાણ - ભક્ત કવિ ઇસરદાસજી . . .  देवियांण – भक्त कवि ईसरदासजी छन्द- अडल करता हरता श्रीं ह्नोंकारी काली कालरयण कौमारी ससिसेखरा सिथेसर नारी जग नीमवण जयो जडधारी।1। धवा धवळगर धव धू धवळा क्रसना कुबजा कचत्री कमळा चलाचला चामुंडा चपला विकटाविकट भू बाला विमला ।2। 90 सुभगा सिवा जया श्री अंबा परिया परंमार पालंबा पिसाचणि साकणि प्रतिबंबा अथ आराधिजे अवलंबा।3। सं कालिका सारदा समया त्रिपुरा तारणि तारा त्रनया ओहं सोहं अखया अभया आई अजया विजया उमया ।4। छंद भुजंगी देवी उम्मया खम्मया ईसनारी देवी धारणी मुंड त्रिभुवन्नधारी देवी सब्बदां रूप ओम रूप सीमा देवी वेद पारक्ख धरणी ब्रहम्मा । 1। देवी कालिका मां नमो भद्रकाली देवी दूरगा लाघवं चारिताली देवी दानवा काल सुरपाल देवी देवी साधकं चारणं सिद्ध सेवी ।2। देवी जख्खणी भख्खणी देव जोगी देवी निर्मला भोज भोगी निरोगी देवी मात जानेसुरी व्रन्न मेहा देवी देव चामुंड संख्याति देहा ।3। देवी भंजणी दैत सेना समेता देवी नेतना तप्पना जय नेता देवी कालिका कूबजा कामकामा देवी रेणुका सम्मला रामरामा ।4। देव मालळी जोगणी मत्त मेघा द...

तनोटराय माता आवड़

: श्री आवड़ माता(तनोट माता) के आशीर्वाद से भारतीय सेना की तनोट के युद्ध में चमत्कारी विजय- (पोस्ट पढ़ने के बाद शेयर जरूर करे) डॉ नरेन्द्र सिंह आढा झांकर  इतिहास व्याख्याता राउमावि घरट सिरोही  भगवती श्री आवड़ माता ने वि• स• 808 चैत्र सुदी नवमी मंगलवार के दिन चारण मामड़जी के घर अवतार लेकर अपने जीवनकाल में कई चमत्कार कर दिखाये थे जिसकी एक विस्तृत श्रृंखला हैं। श्री आवड़ माता के चमत्कारों के कारण कवियों ने अपनी साहित्यिक रचनाओं में श्री आवड़ माता को 52 नामों से सम्बोधित किया जिसके कारण से भगवती श्री आवड़ माता 52 नामों से  विश्वप्रसिद्ध हुए ।  श्री आवड़ माता के वर्तमान परिपेक्ष्य में चमत्कारों का वर्णन करें तो हमें 20 वीं सदी के सम्पूर्ण विश्व की सर्वाधिक चमत्कारी घटना का स्मरण आ जाता है। ये घटना भारत पाकिस्तान के मध्य लड़े गये तनोट युद्ध (1965 ई) की हैं । भारत पाकिस्तान के बीच 1947 ई के विभाजन के समय से ही सम्बन्ध तनावपूर्ण रहें हैं । इसका मुख्य कारण भारत द्वारा कश्मीर रियासत का भारत संघ में विलय करना था। पाकिस्तान कश्मीर घाटी पर अधिकार करना चाहता था । इसी कार...

જુંગીવારા વિર વછરાજ સોલંકીનો ઇતિહાસ

જુંગીવારા વાછરા રાણા,ગાઉં તારા હેતથી ગાણા              દૂહો:- બેહ ગામે બેસણાં ધન્ય જુંગીવારા ધામ                   હૈયાની પુરે હામ વિશ્વાસુની વાછરો દેવભૂમિ દ્વારકા જિલ્લાના જામ ખં...