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Sapakharu

||चांपराज वाळानुं सपाखरू||-गीगा बापु बारोट*

               *||गीत सपाखरु||*
वडां भारथां रचाया खेल कौरवारां पांडवारां कणॅ पारथारा जुध्द हुवा प्रले काळ बाणरा टंकार आरपार आसमान बागा पन्नगां थडक्का लागा सातमे पाताळ...(१)
ठांकीया कौरवां बाणे पडी माथे मेधधारा छूटा बाण पारथारा आकरा समोह जाटा शुरधीर ठार ठार वीर रस जागा रोपीआ करणे पागा धाग धागां रोह...(२)
कोदंडां छूटीया बाण भुजदंडां धरी कोप्या ब्रह्मंडां धणेण्या अळ्या पोरसाणा भाण हटाया पारथां रथां भलकारा दीया हरी पुत्र सूरजारा थारा अतागे प्रमाण...(३)
बलाकारी कणॅ भारी पारथारि पोठ्या बाणे ठयाॅ विधिआरा धारा माटे नही काळ वेषधारी विपरारा अंतेकाळे आव्या हरी दाढ भांगी कंचनारी समप्पी दयाळ...(४)
वखाणुं अखाडा बीजा सूयॅवंशी तणा वळी निवेडा भंडेरा लीआ जेताणारा नाथ जेम दळां वादळां जीं बादशाहा आया जारे भूप चांपराजे तारे मांडीयो भाराथ...(५)
शीशने उतारी वाळा मुंडमाळा रोपी शिव हाल्या धडां भडेवाने तेग धारी हाथ पडे काळां धोम जाळां प्रलेकाळां जेम पोच्या भाण रथां खेंची जोवा लागीया भारथ...(६)
सामसामा मळ्यां दळां भडेवाने जेम छुटा बछुटा तोपका गोळा त्रुटा भालां बाज प्राछटे उधडे राडे कोप काळा खाग पाडे रुंड मुंडां दडे शूरां दुठा चांपराज...(७)
मेंगळां खोपरां तोडे उडाडीया आसमाने पडया दूर जेम चड्या वितोळारा पान खेलाडी रमाडे दडा शिर धडा तेम खेले मळ्यां दळां बादशारा फनाका मकान...(८)
रगताळा पूरवाळा खाळा नाळा वहे रोगा पशु पंखी वाळा टोळा धराणा पंजाळ पंखाणीयुं मांस लोळा गळेवा हिलोळा पेठा माथे शूरां अपसरा रोपे वरमाळ...(९)
दंतूशळां उखेडीआ कुंभाथळां तोड दंता खळां दळां वाळां दळां दलीरा खलास डम्मरू पिशाच वाळा शुक ताळा हाक डाक हुवा भेरवाण पीवा रगतां हुलास...(१०)
सात दन लड्यां पछी पृथी सरे पड्यां चांपा अड्या देवतारा गड्या नगारा आकाश नहि डर्या मोतथी ने पृथी सरे कर्या नामा वर्या अपसरां कर्या सुरापूरी वास...(११)
कवितारा ललकारा मसाणे जाचवा कजु कीरति सांभळी जारे खरा खरी कान आया हरी बरोबरी तणा ऐभलेश अंगे देह धारी फरी करी दीया तुरी दान...(१२)
          *रचयिता :-गीगा बापु बारोट*

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