મુખ્ય સામગ્રી પર જાઓ

Jay Pithad Maa

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
*🙏🏻जय जय माँ पीठड आई🙏🏻*

*पीठड आई प्राण थी प्यारी,नेजाळी नी वात निराली (टेक)*
*वांची चिठ्ठी विस्तारथी भुपे,जाहल जोखम थई (२)*
*ऐ...भाळ मळे नई भुप ने ऐवी,अवघी ओछी रई,*
*बतावो उपाय कोई सहेलो,वळु जट सिंध हु वेलो,*
*६पीठड आई प्राण थी प्यारी..(टेक)*
*जाहल मुंजाणी सिंध मा जे दी,ऐने समरी सोयानी(२)*
*ऐ...पछी जागती जयोतु सिंध ने टिंबे,रात आख्यु मा रई,*
*वेली परभात ने टाणे,जोराळी जाय जुनाणे,*
*पीठड आई प्राण थी प्यारी (टेक)*
*नवधणे जो ने निरखी जाणी,आई पीठड पंजाळी(२)*
*ऐ...मोडे मोडे तोय मात देखाणी,सामे थी सोयानी,*
*तारा हदय मा रैयतना पाणी,आंखडी ये आई देखाणी,*
*पीठड आई प्राण थी प्यारी(टेक)*
*भावथी बोले कोई भाव मजानो,रहे भेळियनो त्या भाव(२)*
*ऐ...माडी गुण नो बेली आवजे वेली,*
*बेलप करवा ने बाई,*
*करु छु साद आ छेलो, आवी ने उगारजे वेलो,*
*पीठड आई प्राण थी प्यारी(टेक)*
*श्री पीठड आई घाम (गाम:पीठड)*
    *🌹पीठड परिवार ने🌹*
*🙏पुजारी अनिलगीरी ना🙏*
   *🔔जय माताजी🔔*
*🖊टाइपिंग :- 🙏🏻गोसाई अनीलगीरी बाबुगीरी🙏🏻*
*📝रचीयता :-*
*चारण कवि श्री शकितदान मोरादानजी*
*गाम:माणेकवाळा*
🔱🌺🔱🌺🔱🌺🔱🌺🔱
*🙌🏻🔱माँ पीठड आई नी महेर🔱🙌🏻*
*👨‍👨‍👦‍👦श्री पीठड आई परिवार:~ पीठड👨‍👨‍👦‍👦*
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

ટિપ્પણીઓ

આ બ્લૉગ પરની લોકપ્રિય પોસ્ટ્સ

ભરવાડ સમાજનો ગૌરવવંતો ઇતિહાસ

*🔥 વરહડા નો "રૂપો ભરવાડ"🔥*     👉🏻     આ ઘટના ખંભાત મા નવાબ સરકાર વખત ની છે. વરહડા ગામ ખંભાત થી  ચારેક ગાઉ પર છે. આ ગામ મા જાજી વસ્તી મોલેસ્લામ ગરાસિયાઓની , કરફાટ મીજાજ ના મોલેસ્લ...

જય શ્રી સ્વામીનારાયણ

ગોપાળાનંદ સ્વામી ના વચને જે બોરડી ના કાંટા ખરી ગયાં હતાં, એ પ્રસાદીની કાંટા વીનાની બોરડી......... આ બોરડી 188 વર્ષ જૂની છે. આ બોરડી વૃક્ષ રાજકોટ સ્વામિનારાયણ મંદિર માં છે. સર જહોન માલ...

Swarga Our Nark

*ब्रह्माण्ड के चौदह भुवन, स्वर्ग-नर्क व अन्यान्य लोकों का वर्णन!*🚩🙏 भारतीय पौराणिक ग्रंथों में बहुत सारे अंश प्रक्षिप्त हैं | उन्हें बाद के समयों में अर्थलोलुप और परान्न्भोजी विद्वानों ने कुटिलता पूर्वक (कही-कहीं कथा के रूप में) अलग से लिखा है | इससे धर्म की महती हानि हुई है। आधुनिक विद्वानों का ये कर्तव्य है कि वे धार्मिक ग्रंथों में आई उन विसंगतियों को दूर करें जिनसे भ्रम या भ्रान्ति की स्थिति बनती है | ज्ञान से ही श्रेष्ठता और विनम्रता आती है | धर्मान्ध आक्रमणकारियों ने मध्ययुग में अत्यधिक मात्रा में प्राचीन भारतीय ग्रंथों को अग्नि में भास्मिसात कर दिया जिनमे बहुमूल्य जाकारियां थी | फिर भी तत्कालीन कुछ विद्वानों के अतुलनीय बलिदानों से कई सारे ग्रन्थ सुरक्षित रह गए जिनमे बौद्ध और जैन धर्म के ग्रन्थ भी थे | इन बौद्ध और जैन धर्मग्रंथों में वर्णित ब्रह्माण्ड की संरचना, विभिन्न लोकों, उन लोकों में रहने वाले प्राणियों और वहाँ के नियमों की जानकारियाँ सनातन धर्मग्रंथों से प्रेरित हैं। उनका कहना है कि समस्त संसारी जीवों का अस्तित्व नारकी, देव, तिर्यक (पशु, पक्षी, कीड़े,) और मनुष्य...