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रचियता : कवि श्री नागदेव गढवी टाइप : मनुदान गढवी .....

जय माताजी 

माडी तारी लीली रे वाडी ने लीलो तारो नेहडो ,
लीलो राखजे चारण कुळनो नेह रे सरधारनी सींहमोय .......
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

पहेला प्रणाम पृथ्वी मातने ,
पछी लीधा काई रवेशी रवराई ना नाम रे सरधारनी सींहमोय ........
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

आपा रे धनराज हीमत तमे ना हारसो ,
वारे तारी सिंहण जीवणी आइनो साथ रे ,
सरधार नी सिंहमोय .......
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

माडी तमे बादशाहना चीरीने कर्या बे भाग जो .,
माडी   ( एने ). उंधो रे पछाडी ने थाप्यो पीर रे सरधार नी सिंहमोय .............
आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

माडी दीकरीयु नी लाजु राखवा वेली आवजे ,,
 नागदेव कहे वीलंब ना करजे मोरी मात रे सरधार नी सिंहमोय  ........

आइ ते तो बाकरने मारयो रे भरी बजारमां

    भुल चुक क्षमा करजो 

रचियता : कवि श्री नागदेव गढवी

टाइप : मनुदान गढवी .....

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